डोनाल्ड ट्रंप का एक और बड़ा फैसला, जिसका दुनिया कर रही थी इंतजार, इस ताकतवर कुर्सी के नए बॉस होंगे ‘केविन वॉर्श’

“अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्व फेडरल रिजर्व गवर्नर केविन वॉर्श को केंद्रीय बैंक के अगले चेयर के रूप में नामित किया है, जो जेरोम पॉवेल की जगह लेंगे। यह फैसला वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि वॉर्श फेड की मौजूदा नीतियों के आलोचक हैं और ब्याज दरों में कटौती की वकालत करते हैं। नामांकन सीनेट की मंजूरी पर निर्भर है, जो रिपब्लिकन बहुमत के कारण आसान हो सकता है।”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फेडरल रिजर्व के चेयर पद के लिए केविन वॉर्श को नामित कर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह नामांकन ऐसे समय में आया है जब ट्रंप लगातार जेरोम पॉवेल पर ब्याज दरों को तेजी से कम न करने का आरोप लगाते रहे हैं। वॉर्श, जो 2006 से 2011 तक फेड गवर्नर रह चुके हैं, केंद्रीय बैंक की मौजूदा संरचना को सुधारने के पक्षधर हैं और इसे अधिक प्रभावी बनाने की बात करते हैं। उनके नेतृत्व में फेड की नीतियां ट्रंप की आर्थिक एजेंडा से अधिक जुड़ सकती हैं, जिसमें मुद्रास्फीति नियंत्रण और आर्थिक विकास पर जोर है।

वॉर्श की पृष्ठभूमि में वित्तीय संकट के दौरान की भूमिका प्रमुख है। उन्होंने वैश्विक वित्तीय संकट के समय फेड की रणनीतियों में योगदान दिया, लेकिन बाद में क्वांटिटेटिव ईजिंग जैसी नीतियों की आलोचना की। ट्रंप का यह चयन रिपब्लिकन आर्थिक हलकों में स्वागत योग्य है, क्योंकि वॉर्श स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में लेक्चरर और हूवर इंस्टीट्यूशन में फेलो हैं, जहां वे अर्थशास्त्र पर काम करते हैं। नामांकन की घोषणा सोशल मीडिया पर की गई, जिसने बाजारों में हलचल मचा दी। स्टॉक फ्यूचर्स में मामूली गिरावट देखी गई, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि वॉर्श की नियुक्ति लंबे समय में निवेशकों का विश्वास बढ़ा सकती है।

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केविन वॉर्श की प्रमुख योग्यताएं और अनुभव

केविन वॉर्श को फेड चेयर के लिए चुनने के पीछे उनकी विशेषज्ञता प्रमुख कारक है। यहां उनके करियर के मुख्य बिंदु हैं:

शिक्षा और शुरुआती करियर : स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट, जहां उन्होंने अर्थशास्त्र और कानून की पढ़ाई की। वॉल स्ट्रीट पर मॉर्गन स्टैनली में काम किया, जहां वे मर्जर और एक्विजिशन पर फोकस करते थे।

फेडरल रिजर्व में भूमिका : 2006 में राष्ट्रपति जॉर्ज बुश द्वारा नियुक्त, सबसे युवा गवर्नर बने। 2008 के वित्तीय संकट में फेड की रेस्क्यू योजनाओं में शामिल रहे, लेकिन बाद में फेड की अतिरिक्त शक्तियों की आलोचना की।

ट्रंप के साथ संबंध : ट्रंप के पहले कार्यकाल में फेड चेयर के लिए विचारित, लेकिन तब पॉवेल चुने गए। अब ट्रंप उन्हें “स्मार्ट और मजबूत” बताते हैं, जो आर्थिक दबावों से निपट सकते हैं।

आलोचनाएं : वॉर्श फेड को “अनावश्यक रूप से जटिल” मानते हैं और इसे सुव्यवस्थित करने की बात करते हैं। वे मुद्रास्फीति को काबू में रखने के लिए सख्त मौद्रिक नीति के समर्थक हैं, लेकिन ट्रंप की तरह ब्याज दरों में कटौती चाहते हैं।

ट्रंप के फैसले का वैश्विक प्रभाव

यह नामांकन अमेरिका से बाहर भी असर डालेगा, खासकर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर। भारत जैसे देशों में डॉलर की मजबूती से रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे आयात महंगा हो सकता है। यदि वॉर्श ब्याज दरों को तेजी से कम करते हैं, तो वैश्विक निवेश बढ़ सकता है, लेकिन मुद्रास्फीति का जोखिम भी रहेगा। विशेषज्ञों का अनुमान है कि फेड की नई नीतियां 2026 में वैश्विक जीडीपी ग्रोथ को 0.5% तक प्रभावित कर सकती हैं।

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सीनेट पुष्टि की चुनौतियां

क्षेत्रसंभावित प्रभावउदाहरण
स्टॉक मार्केटशुरुआती गिरावट के बाद रिकवरी, क्योंकि कम ब्याज दरें निवेश बढ़ाती हैंS&P 500 में 1-2% की वृद्धि की उम्मीद
मुद्रास्फीतिनियंत्रण में रखने के प्रयास, लेकिन ट्रंप की नीतियों से दबावअमेरिका में 2026 में 2.5% मुद्रास्फीति लक्ष्य
वैश्विक व्यापारडॉलर कमजोर होने से निर्यात बढ़ सकता हैभारत के IT सेक्टर को फायदा, क्योंकि अमेरिकी कंपनियां अधिक निवेश करेंगी
उभरते बाजारपूंजी प्रवाह में वृद्धि, लेकिन अस्थिरताब्राजील और भारत जैसे देशों में FDI 10% बढ़ सकता है

नामांकन को सीनेट से मंजूरी मिलनी बाकी है, जहां रिपब्लिकन बहुमत है। हालांकि, डेमोक्रेट्स वॉर्श की फेड स्वतंत्रता पर राय को लेकर सवाल उठा सकते हैं। सुनवाई में उनके पिछले बयानों पर फोकस होगा, जैसे कि फेड को राजनीतिक दबाव से मुक्त रखने की जरूरत। यदि मंजूर होता है, तो वॉर्श मई में पद संभालेंगे, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। ट्रंप का यह कदम उनकी आर्थिक टीम को मजबूत करने का हिस्सा है, जिसमें पहले से ही कई रिपब्लिकन विशेषज्ञ शामिल हैं।

आर्थिक सुधारों की दिशा

वॉर्श के नेतृत्व में फेड बैंकिंग रेगुलेशंस को सरल बना सकता है, जो छोटे बैंकों को राहत देगा। वे डिजिटल करेंसी और क्रिप्टो पर सख्त रुख अपनाने के पक्षधर हैं, जो बिटकॉइन जैसे एसेट्स पर असर डालेगा। ट्रंप की टैरिफ नीतियों के साथ मिलकर, यह अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को बूस्ट कर सकता है। हालांकि, पर्यावरण नीतियों पर फेड की भूमिका बढ़ाने की मांग को वे नजरअंदाज कर सकते हैं, जो जलवायु परिवर्तन से जुड़े निवेशों को प्रभावित करेगा।

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बाजारों की प्रतिक्रिया और भविष्य की संभावनाएं

नामांकन की खबर से बॉन्ड यील्ड में बदलाव देखा गया, जहां 10-ईयर ट्रेजरी नोट्स में 0.2% की गिरावट आई। निवेशक वॉर्श की पहली बैठक पर नजर रखेंगे, जहां वे मुद्रास्फीति लक्ष्य को 2% पर रखने या बदलने का फैसला कर सकते हैं। यदि वे ट्रंप के दबाव में आते हैं, तो फेड की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं, लेकिन उनके अनुभव से स्थिरता की उम्मीद है। कुल मिलाकर, यह फैसला 2026 की वैश्विक आर्थिक दिशा तय करेगा, जहां अमेरिका की नीतियां भारत जैसे सहयोगी देशों को भी प्रभावित करेंगी।

Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न रिपोर्टों और विशेषज्ञ विश्लेषणों पर आधारित है।

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