“नई कार शोरूम से निकलते ही अगर एक्सीडेंट हो जाए, तो मरम्मत की जिम्मेदारी मुख्य रूप से इंश्योरेंस कंपनी पर आती है, बशर्ते पॉलिसी सक्रिय हो। डीलर केवल डिलीवरी के दौरान दोषी होने पर जिम्मेदार होता है, जबकि मालिक को क्लेम प्रक्रिया संभालनी पड़ती है। 2026 में थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य है, जो तीसरे पक्ष को कवर करता है, लेकिन अपनी कार के नुकसान के लिए कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी जरूरी।”
नई कार खरीदते समय इंश्योरेंस पॉलिसी आमतौर पर डीलर द्वारा ही जारी की जाती है, जो रजिस्ट्रेशन के साथ सक्रिय हो जाती है। मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के तहत, नई कारों के लिए तीन साल की थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य है, जो एक्सीडेंट में तीसरे पक्ष की क्षति को कवर करती है। अगर एक्सीडेंट आपकी गलती से होता है, तो इंश्योरेंस कंपनी मरम्मत का खर्च उठाती है, लेकिन डिडक्टिबल राशि मालिक को चुकानी पड़ सकती है।
अगर एक्सीडेंट दूसरे पक्ष की गलती से होता है, तो उनकी इंश्योरेंस कंपनी आपकी कार की मरम्मत के लिए जिम्मेदार होती है। हाल के मामलों में, जैसे 2025 में इंदौर में एक कस्टमर की नई Kia कार डीलरशिप पर ही क्षतिग्रस्त हो गई, जहां डीलर को कानूनी नोटिस मिला और मरम्मत की जिम्मेदारी डीलर पर आई क्योंकि गाड़ी उनकी कस्टडी में थी। लेकिन शोरूम से निकलने के बाद, अगर मालिक ड्राइव कर रहा है, तो डीलर की जिम्मेदारी समाप्त हो जाती है।
2026 में इंश्योरेंस नियमों के अनुसार, नई कार की पॉलिसी डिलीवरी के समय से प्रभावी मानी जाती है। अगर पॉलिसी में जीरो डेप्रिशिएशन ऐड-ऑन है, तो मरम्मत पर पूरा क्लेम मिलता है, अन्यथा डेप्रिशिएशन कटौती होती है। उदाहरण के लिए, एक नई Maruti Swift की मरम्मत पर अगर बॉडी पार्ट्स क्षतिग्रस्त हैं, तो कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी के तहत 80-90% खर्च इंश्योरेंस कवर करती है।
मुख्य जिम्मेदारियां:
इंश्योरेंस कंपनी: अपनी क्षति (ओन डैमेज) के लिए कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी जरूरी। थर्ड-पार्टी कवर केवल दूसरे पक्ष को बचाता है। 2026 में प्रीमियम रेट्स में 5-7% वृद्धि देखी गई है, लेकिन क्लेम रेट 95% तक तेजी से सेटल होते हैं अगर दस्तावेज पूरे हों।
कार मालिक: क्लेम फाइल करने की जिम्मेदारी मालिक की। एक्सीडेंट के तुरंत बाद पुलिस FIR, फोटो और डीलर को सूचित करें। अगर पॉलिसी डीलर से ली है, तो वे क्लेम प्रोसेस में मदद करते हैं, लेकिन खर्च मालिक को पहले चुकाना पड़ सकता है।
शोरूम/डीलर: केवल अगर एक्सीडेंट डिलीवरी के दौरान या उनकी गलती से हुआ, जैसे स्टाफ द्वारा ड्राइविंग में। कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 के तहत, डीलर को सर्विस डिफिशिएंसी पर जुर्माना लग सकता है, जैसा कि 2025 के बेंगलुरु मामले में Rs 14 लाख की SUV पर हुआ।
क्लेम प्रक्रिया के चरण:
एक्सीडेंट के बाद गाड़ी को सुरक्षित जगह ले जाएं और पुलिस को सूचित करें।
इंश्योरेंस कंपनी को 24 घंटे के अंदर सूचना दें, अन्यथा क्लेम रिजेक्ट हो सकता है।
आवश्यक दस्तावेज: RC, ड्राइविंग लाइसेंस, FIR, मरम्मत एस्टिमेट।
सर्वेयर जांच के बाद क्लेम अप्रूव होता है; कैशलेस मरम्मत अधिकतर गैरेज में उपलब्ध।
| स्थिति | जिम्मेदार पक्ष | कवरेज डिटेल्स (2026 रेट्स पर आधारित) |
|---|---|---|
| एक्सीडेंट मालिक की गलती से | इंश्योरेंस कंपनी | ओन डैमेज क्लेम, डिडक्टिबल Rs 2,000 तक |
| एक्सीडेंट दूसरे की गलती से | दूसरे पक्ष की इंश्योरेंस | पूरा खर्च, लेकिन कानूनी प्रक्रिया लग सकती है |
| डीलर की कस्टडी में क्षति | डीलर | कंज्यूमर कोर्ट के जरिए मुआवजा, Rs 50,000 तक जुर्माना संभव |
| कोई इंश्योरेंस नहीं | मालिक | पूरा खर्च खुद, प्लस जुर्माना Rs 2,000 पहली बार |
अगर पॉलिसी में RTI (रिटर्न टू इनवॉइस) ऐड-ऑन है, तो कुल नुकसान पर शोरूम प्राइस के बराबर क्लेम मिलता है। 2026 में EV कारों के लिए स्पेशल इंश्योरेंस में बैटरी कवर अतिरिक्त 10% प्रीमियम पर उपलब्ध। मालिक को हमेशा पॉलिसी डिटेल्स चेक करनी चाहिए, क्योंकि 70% क्लेम रिजेक्शन अधूरे दस्तावेजों से होते हैं।
टिप्स क्लेम को तेज करने के लिए:
डीलर से इंश्योरेंस लेते समय कैशलेस गैरेज नेटवर्क चेक करें।
एक्सीडेंट स्पॉट पर वीडियो रिकॉर्ड करें।
सालाना रिन्यूअल से पहले NCB (नो क्लेम बोनस) क्लेम करें, जो 50% तक डिस्काउंट देता है।
अगर कार लोन पर है, तो बैंक को भी सूचित करें, क्योंकि वे सह-मालिक होते हैं।
Disclaimer: यह लेख सामान्य सूचना, रिपोर्ट और टिप्स के लिए है। स्रोतों पर आधारित लेकिन कानूनी सलाह नहीं माना जाए। पेशेवर सलाह लें।