“केंद्र सरकार आज कैबिनेट कमिटी की बैठक में तय करेगी कि वित्त वर्ष 2026-27 का यूनियन बजट 1 फरवरी को पेश होगा या नहीं। 1 फरवरी रविवार होने से असमंजस है, जबकि परंपरा से बजट फरवरी के पहले दिन आता है। अगर पोस्टपोन हुआ तो 2 फरवरी संभावित है। अर्थव्यवस्था पर इसका असर और स्टेकहोल्डर्स की उम्मीदें चर्चा में हैं।”
केंद्र सरकार की कैबिनेट कमिटी ऑन पार्लियामेंट्री अफेयर्स (CCPA) आज बैठक में फैसला लेगी कि फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को यूनियन बजट पेश करेंगी या नहीं। सूत्रों के मुताबिक, 1 फरवरी रविवार पड़ने से परंपरा टूट सकती है, क्योंकि बजट आमतौर पर वर्किंग डे पर ही पेश किया जाता है। अगर तारीख आगे बढ़ी तो 2 फरवरी यानी सोमवार को बजट आने की संभावना है। यह फैसला बजट सेशन की शुरुआत को प्रभावित करेगा, जो सामान्यतः 31 जनवरी से शुरू होता है।
पिछले कुछ सालों में बजट की तारीख फिक्स रही है। 2021 से बजट 1 फरवरी को ही पेश हो रहा है, लेकिन 2026 में वीकेंड का मुद्दा नया ट्विस्ट ला रहा है। हिस्टोरिकल रिकॉर्ड्स दिखाते हैं कि 1980 में इंदिरा गांधी ने शनिवार को अंतरिम बजट पेश किया था, लेकिन फुल बजट के लिए ऐसा कम ही हुआ है। अगर 1 फरवरी पर ही रहा तो यह पहला मौका होगा जब फुल बजट रविवार को आएगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे मार्केट में अनिश्चितता बढ़ सकती है, क्योंकि स्टॉक एक्सचेंज वीकेंड पर बंद रहते हैं।
बजट की तैयारी पहले से चल रही है। फाइनेंस मिनिस्ट्री ने दिसंबर 2025 से ही प्री-बजट मीटिंग्स शुरू कर दी थीं। इंडस्ट्री बॉडीज जैसे FICCI और CII ने अपनी सिफारिशें दी हैं, जिनमें टैक्स रिफॉर्म्स, इंफ्रास्ट्रक्चर स्पेंडिंग और एमएसएमई सपोर्ट पर फोकस है। अगर तारीख पोस्टपोन हुई तो प्री-बजट डिस्कशंस और इकोनॉमिक सर्वे की रिलीज भी शिफ्ट हो सकती है। इकोनॉमिक सर्वे सामान्यतः बजट से एक दिन पहले आता है, जो 31 जनवरी को होगा अगर 1 फरवरी फाइनल रही।
अर्थव्यवस्था के लिहाज से यह बजट क्रिटिकल है। GDP ग्रोथ 2025-26 में 6.5-7% रहने का अनुमान है, लेकिन इन्फ्लेशन 4-5% के आसपास मंडरा रहा है। RBI ने हाल ही में रेपो रेट 6.5% पर रखा है, और बजट में फिस्कल डेफिसिट को 4.5% तक लाने का टारगेट हो सकता है। सेक्टर-वाइज, एग्रीकल्चर में सब्सिडी बढ़ाने की मांग है, क्योंकि मॉनसून 2025 में औसत से कम रहा। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर PLI स्कीम के तहत 2 लाख करोड़ का अतिरिक्त अलोकेशन चाहता है।
| सेक्टर | अपेक्षित अलोकेशन (रुपये में) | मुख्य फोकस |
|---|---|---|
| इंफ्रास्ट्रक्चर | 10 लाख करोड़ | रोड, रेल और अर्बन डेवलपमेंट |
| हेल्थ | 1.5 लाख करोड़ | पैनडेमिक प्रिपेयरनेस और आयुष्मान भारत एक्सपैंशन |
| एजुकेशन | 1.2 लाख करोड़ | डिजिटल लर्निंग और स्किल डेवलपमेंट |
| डिफेंस | 6 लाख करोड़ | मेक इन इंडिया और बॉर्डर सिक्योरिटी |
| एमएसएमई | 50 हजार करोड़ | क्रेडिट गारंटी और एक्सपोर्ट प्रमोशन |
यह टेबल बजट एक्सपेक्टेशंस पर आधारित है, जो इंडस्ट्री रिपोर्ट्स से ली गई है। अगर बजट 1 फरवरी पर आया तो मार्केट्स में पॉजिटिव सेंटिमेंट बढ़ेगा, लेकिन पोस्टपोनमेंट से शॉर्ट-टर्म वोलेटिलिटी आ सकती है। सेंसेक्स हाल ही में 80,000 के ऊपर ट्रेड कर रहा है, और बजट अनाउंसमेंट से पहले निवेशक सतर्क हैं।
टैक्सपेयर्स के लिए भी यह महत्वपूर्ण है। इनकम टैक्स स्लैब्स में बदलाव की उम्मीद है, जहां बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट 3 लाख से बढ़कर 5 लाख हो सकती है। ओल्ड टैक्स रिजीम में सेक्शन 80C की लिमिट 1.5 लाख से 2 लाख करने की चर्चा है। कॉरपोरेट टैक्स रेट 25% पर रहेगा, लेकिन स्टार्टअप्स के लिए इंसेंटिव्स बढ़ सकते हैं। EV सेक्टर में सब्सिडी एक्सटेंशन की मांग है, क्योंकि FAME-III स्कीम 2026 में लॉन्च हो सकती है।
पॉलिसीमेकर्स का कहना है कि बजट आत्मनिर्भर भारत पर फोकस करेगा, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग हब बनने के लिए 5G और AI इन्वेस्टमेंट्स शामिल हैं। रूरल इकोनॉमी को बूस्ट देने के लिए MNREGA फंड 1 लाख करोड़ तक बढ़ सकता है। क्लाइमेट चेंज पर, रिन्यूएबल एनर्जी के लिए 50 हजार करोड़ का प्रोविजन संभावित है।
अगर आज का फैसला 1 फरवरी के पक्ष में गया तो पार्लियामेंट सेशन की नोटिफिकेशन जल्द जारी होगी। अन्यथा, 2 फरवरी को शिफ्ट होने से विपक्ष सवाल उठा सकता है। कुल मिलाकर, यह फैसला न सिर्फ बजट की टाइमलाइन बल्कि इकोनॉमिक सेंटिमेंट को शेप देगा।
Disclaimer: यह रिपोर्ट समाचार स्रोतों, विशेषज्ञ विश्लेषण और उपलब्ध डेटा पर आधारित है। सलाह के रूप में इसका उपयोग न करें; निवेश या वित्तीय निर्णय लेने से पहले पेशेवर सलाह लें।