“समुद्री हवा से कार में जंग और पेंट खराब होता है, जबकि भारी ट्रैफिक क्लच व ब्रेक को तेजी से घिसता है, जिससे रीसेल वैल्यू 20-50% तक गिर सकती है; हालिया अध्ययनों से पता चलता है कि तटीय इलाकों में कारें 10-20 मील दूरी पर प्रभावित होती हैं और भारतीय शहरों में ट्रैफिक घनत्व से डेप्रिशिएशन रेट 15-20% सालाना बढ़ जाता है।”
समुद्री हवा में नमक के कण कार की बॉडी पर जमते हैं, जो जंग को तेजी से फैलाते हैं। तटीय क्षेत्रों में रहने वाली कारों की अंडरकैरिज और दरवाजों के किनारे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, जिससे संरचना कमजोर हो जाती है। हालिया रिसर्च से पता चलता है कि 10-20 मील की दूरी पर भी समुद्री स्प्रे कार के पेंट को फीका कर देता है, क्लियर कोट को नुकसान पहुंचाता है। इससे कार की लाइफस्पैन 20-30% तक कम हो सकती है।
भारी ट्रैफिक में बार-बार रुकना-चलना क्लच, ब्रेक पैड्स और सस्पेंशन पर अतिरिक्त दबाव डालता है। भारतीय शहरों जैसे चेन्नई और दिल्ली में वाहन घनत्व प्रति किलोमीटर सड़क पर सबसे ज्यादा है, जो वियर एंड टियर को दोगुना कर देता है। MoRTH के डेटा से पता चलता है कि ऐसे इलाकों में कारों की डेप्रिशिएशन रेट पहले साल 15-20% तक पहुंच जाती है, जबकि सामान्य स्थिति में यह 10-15% होती है।
कार की कीमत में गिरावट सीधे इन नुकसानों से जुड़ी है। जंग लगी या घिसी हुई पार्ट्स वाली कार रीसेल मार्केट में 20-40% कम दाम पर बिकती है। तटीय शहरों में कारें 5 साल में 45-55% वैल्यू खो देती हैं, जबकि ट्रैफिक वाले इलाकों में माइलेज ज्यादा होने से यह रेट और बढ़ जाता है।
कार को नुकसान से बचाने के तरीके:
नियमित वॉशिंग से नमक हटाएं, खासकर अंडरबॉडी पर।
एंटी-रस्ट कोटिंग लगवाएं, जो 2-3 साल तक सुरक्षा देती है।
ट्रैफिक में स्मूथ ड्राइविंग से क्लच पर दबाव कम करें।
सालाना मेंटेनेंस से ब्रेक और सस्पेंशन चेक करवाएं।
सन प्रोटेक्शन फिल्म से पेंट को UV और नमक से बचाएं।
डेप्रिशिएशन रेट की तुलना (भारतीय शहरों में):
| कार का प्रकार | तटीय इलाका (समुद्री हवा) | भारी ट्रैफिक (शहरी) | सामान्य स्थिति | 5 साल बाद वैल्यू लॉस (%) |
|---|---|---|---|---|
| सेडान | 20-25% सालाना | 18-22% सालाना | 15% सालाना | 50-55 |
| SUV | 18-22% सालाना | 20-25% सालाना | 12-15% सालाना | 45-50 |
| हैचबैक | 22-28% सालाना | 15-20% सालाना | 10-12% सालाना | 55-60 |
ये आंकड़े हालिया ट्रेंड्स पर आधारित हैं, जहां तटीय शहरों में कारें ज्यादा प्रभावित होती हैं। ट्रैफिक घनत्व से पार्ट्स की मरम्मत लागत 30% तक बढ़ जाती है, जो कुल कीमत को और कम करती है।
प्रमुख प्रभावित पार्ट्स और उनका असर:
अंडरकैरिज: समुद्री हवा से जंग, ट्रैफिक से धूल-मिट्टी से ब्लॉकेज।
पेंट और क्लियर कोट: UV और नमक से फेडिंग, रीसेल वैल्यू 10-15% कम।
ब्रेक सिस्टम: ट्रैफिक से घिसाव, रिपेयर कॉस्ट 5-10 हजार रुपये extra।
इलेक्ट्रिकल सिस्टम: नमी से शॉर्ट सर्किट, तटीय क्षेत्रों में आम समस्या।
इंजन कंपोनेंट्स: लगातार स्टॉप-गो से ओवरहीटिंग, लाइफ 20% कम।
Disclaimer: यह लेख सूचना उद्देश्यों के लिए है। स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर आधारित रिपोर्ट और टिप्स।