“भारत में गाड़ियां बाईं ओर चलती हैं क्योंकि ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रभाव ने यह नियम स्थापित किया, जबकि दुनिया के ज्यादातर देश दाईं ओर ड्राइव करते हैं। ऐतिहासिक रूप से, मध्ययुगीन यूरोप में तलवारबाजों की सुरक्षा ने बाईं ओर चलने की परंपरा शुरू की, लेकिन नेपोलियन ने यूरोप में दाईं ओर का चलन फैलाया। आज 76 देश बाईं ओर, 163 दाईं ओर अपनाते हैं, जो सड़क सुरक्षा और वाहन डिजाइन को प्रभावित करता है।”
भारत में सड़कों पर गाड़ियां बाईं ओर चलती हैं, जो एक पुरानी परंपरा का हिस्सा है। यह नियम ब्रिटिश शासन से आया, जब 1835 में ब्रिटेन ने Left-Hand Traffic को अनिवार्य बनाया। भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और साउथ अफ्रीका जैसे देशों ने इसे अपनाया क्योंकि वे ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा थे। आज भी, भारतीय सड़कें इसी सिस्टम पर चलती हैं, जहां ड्राइवर सीट दाईं ओर होती है, जो oncoming traffic को बेहतर visibility देती है।
दुनिया में कुल 239 देश और क्षेत्र हैं, जिनमें से 76 Left-Hand Traffic (LHT) अपनाते हैं, जबकि 163 Right-Hand Traffic (RHT) पर चलते हैं। यह विभाजन ऐतिहासिक घटनाओं से आया। मध्ययुग में यूरोप के शूरवीर घोड़ों पर सवार होकर बाईं ओर चलते थे, ताकि उनकी दाईं हाथ वाली तलवार दुश्मन पर आसानी से वार कर सके। रोमन साम्राज्य में भी पैदल यात्री बाईं ओर चलते थे, लेकिन 18वीं सदी में बदलाव आया।
अमेरिका में बड़े वैगनों के कारण दाईं ओर चलने की परंपरा शुरू हुई। वैगन चालक बाएं पिछले घोड़े पर बैठते थे, ताकि दाएं हाथ से चाबुक चला सकें और oncoming वाहनों से टक्कर न हो। फ्रांस में नेपोलियन ने Right-Hand Driving को बढ़ावा दिया, क्योंकि वह left-handed था और अपनी सेनाओं को दाईं ओर मार्च करवाता था। उसकी विजयों ने जर्मनी, इटली, स्पेन और पोलैंड जैसे देशों में यह नियम फैलाया। आज यूरोप के ज्यादातर देश, अमेरिका और एशिया के बड़े हिस्से RHT अपनाते हैं।
भारत में यह नियम बदलना मुश्किल है क्योंकि सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर, साइन बोर्ड और वाहन डिजाइन LHT पर आधारित हैं। अगर स्विच किया जाए, तो लागत अरबों रुपये की होगी, जैसा कि स्वीडन ने 1967 में RHT अपनाते समय अनुभव किया। वहां ट्रैफिक दुर्घटनाएं पहले बढ़ीं, लेकिन बाद में कम हुईं। भारत में NHAI के नियम LHT को मजबूत बनाते हैं, जहां हाईवे पर overtaking दाईं ओर से होती है।
दुनिया में LHT वाले देशों की संख्या कम है, लेकिन वे 35% वैश्विक सड़कों को कवर करते हैं। RHT वाले देश 65% आबादी और 75% सड़कों पर हावी हैं। जापान LHT अपनाता है क्योंकि 19वीं सदी में ब्रिटिश इंजीनियरों ने रेलवे सिस्टम बनाया, जो ट्रैफिक को प्रभावित किया। इंडोनेशिया और थाईलैंड LHT हैं, लेकिन उनके पड़ोसी जैसे चीन RHT पर हैं, जो बॉर्डर क्रॉसिंग को जटिल बनाता है।
नीचे एक टेबल है जो प्रमुख देशों की ड्राइविंग साइड दिखाती है:
| ड्राइविंग साइड | प्रमुख देश | प्रतिशत वैश्विक |
|---|---|---|
| बाईं ओर (LHT) | भारत, UK, ऑस्ट्रेलिया, जापान, साउथ अफ्रीका, इंडोनेशिया | 31% देश |
| दाईं ओर (RHT) | USA, चीन, फ्रांस, जर्मनी, ब्राजील, रूस | 69% देश |
यह विभाजन सड़क सुरक्षा को प्रभावित करता है। LHT देशों में ड्राइवर की आंख oncoming ट्रैफिक पर बेहतर पड़ती है, लेकिन RHT में केंद्र की ओर visibility बढ़ती है। WHO के अनुसार, LHT और RHT के बीच दुर्घटना दर में ज्यादा अंतर नहीं, लेकिन बॉर्डर क्षेत्रों में confusion से जोखिम बढ़ता है। भारत में MoRTH के नियम LHT को सख्ती से लागू करते हैं, जहां roundabouts क्लॉकवाइज घूमते हैं।
कई देशों ने स्विच किया है। म्यांमार ने 1970 में RHT अपनाया, जबकि समोआ ने 2009 में LHT चुना ताकि ऑस्ट्रेलिया से सस्ते वाहन आयात कर सके। भारत में ऐसा कोई प्लान नहीं, क्योंकि अर्थव्यवस्था और परंपरा इसे बनाए रखती है। वैश्विक ऑटो इंडस्ट्री LHT के लिए right-hand drive वाहन बनाती है, जैसे Toyota और Tata Motors भारत के लिए।
यह अंतर पर्यटन को प्रभावित करता है। विदेशी ड्राइवरों को भारत में LHT की आदत डालनी पड़ती है, जो rental कार कंपनियों के लिए training प्रोग्राम चलाती हैं। EV ट्रेंड में भी LHT डिजाइन बरकरार है, जैसे Tesla के right-hand drive मॉडल भारत के लिए। कुल मिलाकर, यह ऐतिहासिक चुनाव आज भी ट्रैफिक सिस्टम को आकार देता है।
Disclaimer: This article is based on historical reports, general tips, and publicly available sources for informational purposes only.