“केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों की प्रमुख संगठन आज दिल्ली में NC-JCM ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठक में 3.25 तक फिटमेंट फैक्टर, 7% सालाना इंक्रीमेंट, OPS की पूरी बहाली, लीव एन्कैशमेंट 400 दिनों तक बढ़ाने और न्यूनतम वेतन 54,000 रुपये जैसी मांगों पर एकजुट होकर चर्चा कर रहे हैं। ये सुझाव जल्द ही 8वें वेतन आयोग की चेयरपर्सन जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को सौंपे जाने वाले कॉमन मेमोरेंडम में शामिल होंगे, जो 1 जनवरी 2026 से प्रभावी माने जाने वाले आयोग की सिफारिशों को आकार देगा।”
8th Pay Commission: 3.25 फिटमेंट फैक्टर, 7% इंक्रीमेंट और OPS बहाली, मीटिंग में उठेंगी ये मांगें; ये रही पूरी लिस्ट
आज 25 फरवरी 2026 को दिल्ली में नेशनल काउंसिल (स्टाफ साइड) जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) की ड्राफ्टिंग कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक शुरू हो गई है। इस हफ्ते भर चलने वाली इस बैठक में शिव गोपाल मिश्रा की अगुवाई में विभिन्न कर्मचारी संघों और पेंशनर संगठनों के प्रतिनिधि 8वें वेतन आयोग के लिए एक साझा मेमोरेंडम तैयार कर रहे हैं। यह मेमोरेंडम आयोग की चेयरपर्सन जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को सौंपा जाएगा, जो 1 जनवरी 2026 से प्रभावी माने जा रहे आयोग की सिफारिशों का आधार बनेगा।
कर्मचारी संगठन 7वें वेतन आयोग के फिटमेंट फैक्टर 2.57 से काफी ऊपर की मांग कर रहे हैं। विभिन्न संघों ने 3.00 से 3.25 तक का फिटमेंट फैक्टर प्रस्तावित किया है, जिसमें लेवल-वाइज अंतर रखने का सुझाव प्रमुख है ताकि निचले स्तर के कर्मचारियों को ज्यादा राहत मिले और सीनियर स्तर पर पे कंप्रेशन न हो।
प्रस्तावित मल्टी-लेवल फिटमेंट फैक्टर संरचना
लेवल 1 से 5: 3.00
लेवल 6 से 12: 3.05 से 3.10
लेवल 13 से 15: 3.05 से 3.15
लेवल 16 से 18: 3.25 तक
यह संरचना निचले पे लेवल वाले कर्मचारियों को मजबूत सुधार देगी, जबकि उच्च पदों पर संतुलन बनाए रखेगी। अगर 3.25 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है तो न्यूनतम बेसिक पे में भारी उछाल आ सकता है, जो वर्तमान 18,000 रुपये से काफी ऊपर जा सकता है। कुछ संगठनों ने न्यूनतम पे 54,000 रुपये तक करने की मांग की है।
इंक्रीमेंट और अन्य वेतन-संबंधी मांगें
वर्तमान में सालाना इंक्रीमेंट 3% है, जिसे कर्मचारी संगठन अपर्याप्त मानते हैं। प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
सालाना इंक्रीमेंट को 7% तक बढ़ाना या हर छह महीने में इंक्रीमेंट देना।
रिटायरमेंट पर लीव एन्कैशमेंट की सीमा 300 दिनों से बढ़ाकर 400 दिन करना।
बेसिक सैलरी और फिटमेंट फैक्टर की गणना के लिए परिवार इकाई (फैमिली यूनिट) को 3 से बढ़ाकर 5 करना, जिससे ज्यादा कर्मचारियों को लाभ मिलेगा।
फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस को उन जगहों पर जहां CGHS अस्पताल नहीं है, 1,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रति माह करना।
LTC को कैश के रूप में देने का विकल्प।
पेंशन और रिटायरमेंट बेनिफिट्स पर फोकस
पेंशन को लेकर सबसे मजबूत मांग पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली है। कर्मचारी संगठन NPS और UPS को खत्म कर OPS को पूरी तरह बहाल करने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि वे इसे रिटायरमेंट के बाद ज्यादा सुरक्षित मानते हैं। डिफेंस और अन्य विभागों के संघों ने भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है।
अन्य प्रमुख मांगें
तकनीकी जरूरतों जैसे इंटरनेट कनेक्शन के लिए अतिरिक्त 10% एलिमेंट।
30 साल की सर्विस में 5 गारंटीड प्रमोशन टाइम-स्केल आधार पर।
प्रमोशन पॉलिसी में सुधार और मेडिकल अलाउंस में बढ़ोतरी।
अधिकतम सैलरी को 4,86,000 रुपये तक ले जाने का सुझाव कुछ संगठनों से आया है।
ये मांगें आयोग की सिफारिशों को प्रभावित करेंगी, हालांकि अंतिम फैसला सरकार और आयोग पर निर्भर करेगा। ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्य एक हफ्ते तक दिल्ली में रहकर इन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
Disclaimer: यह खबर विभिन्न कर्मचारी संगठनों की मांगों और वर्तमान चर्चाओं पर आधारित है। आधिकारिक सिफारिशें आयोग की रिपोर्ट पर निर्भर करेंगी।