EU का GSP लाभ खत्म: भारत के 87% नहीं, सिर्फ 2.7% निर्यात पर असर! जानें सरकार की पूरी सफाई

“यूरोपीय संघ ने GSP लाभ सस्पेंड कर दिए हैं, लेकिन भारत के कुल EU निर्यात का मात्र 2.7% प्रभावित होगा। सरकार ने स्पष्ट किया कि अधिकांश सेक्टर पहले से ग्रेजुएट हो चुके हैं, जबकि प्रभावित क्षेत्रों में टेक्सटाइल्स और मशीनरी शामिल हैं। FTA वार्ताएं जारी हैं, जो भविष्य में राहत दे सकती हैं।”

EU के नए GSP नियमों का विश्लेषण यूरोपीय संघ ने हाल ही में अपना नया रेगुलेशन (EU 2025/1909) लागू किया है, जो 1 जनवरी 2026 से 31 दिसंबर 2028 तक भारत समेत कुछ विकासशील देशों के लिए GSP टैरिफ लाभों को अस्थायी रूप से सस्पेंड करता है। इस योजना के तहत, विकासशील देशों को EU बाजार में कम या शून्य कस्टम ड्यूटी पर निर्यात करने की सुविधा मिलती थी, जो WTO के Most-Favoured-Nation सिद्धांत से छूट के रूप में काम करती है। नए नियमों में कृषि उत्पादों को ग्रेजुएशन से बाहर रखा गया है, जबकि गैर-कृषि क्षेत्र में केवल लेदर को लाभ बहाल किया गया है। भारत के मामले में, यह सस्पेंशन इसलिए हुआ क्योंकि देश के निर्यातों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ने से EU की समीक्षा में कई उत्पाद श्रेणियां ‘ग्रेजुएट’ हो चुकी हैं।

भारत के निर्यात पर सीमित प्रभाव वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, यह बदलाव भारत के कुल EU निर्यात का केवल 2.66% प्रभावित करेगा। 2023 के आंकड़ों के आधार पर, EU ने भारत से €62.2 बिलियन के आयात किए, जिनमें से €12.9 बिलियन GSP के योग्य थे। नए नियमों से €1.66 बिलियन का व्यापार GSP से बाहर हो जाएगा, जबकि शेष €11.24 बिलियन अभी भी योग्य रहेगा। FY 2024-25 में भारत के EU निर्यात $75.85 बिलियन रहे, जो कुल द्विपक्षीय व्यापार $136.53 बिलियन का हिस्सा हैं। सरकार ने स्पष्ट किया कि 87% का आंकड़ा केवल उन निर्यातों का है जो पहले GSP के दायरे में थे, लेकिन कुल निर्यात का यह छोटा हिस्सा ही प्रभावित है। उदाहरण के लिए, एक अपैरल उत्पाद पर पहले 9.6% ड्यूटी लगती थी, जो अब 12% हो सकती है, लेकिन कई उत्पादों पर MFN ड्यूटी पहले से शून्य है।

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प्रभावित क्षेत्र और उनके आंकड़े नए नियम 13 विशिष्ट GSP सेक्शन को प्रभावित करते हैं, जहां भारत के निर्यातों पर उच्च टैरिफ लग सकते हैं। यहां प्रमुख क्षेत्रों का ब्रेकडाउन है:

क्षेत्रFY 2024-25 निर्यात मूल्य (USD बिलियन)प्रभाव का अनुमानटिप्पणी
ऑर्गेनिक केमिकल्स5.07मध्यमकई टैरिफ लाइन्स अभी भी GSP योग्य, लेकिन प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
पर्ल्स और प्रेशियस मेटल्स2.5उच्चमूल्य-संवेदनशील, बांग्लादेश जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा।
इलेक्ट्रिकल मशीनरी और इक्विपमेंट11.25निम्नकुछ भाग MFN पर शून्य ड्यूटी, लेकिन CBAM से अतिरिक्त दबाव।
टेक्सटाइल्स8.2 (अनुमानित)उच्चअपैरल पर ड्यूटी वृद्धि से वियतनाम जैसे प्रतिद्वंद्वियों को फायदा।
आयरन, स्टील और आर्टिकल्स4.3मध्यमइंजीनियरिंग गुड्स में शामिल, लेकिन FTA से राहत संभव।
प्लास्टिक्स और रबर3.1निम्नमूल्य-संवेदनशील, लेकिन कुल हिस्सा छोटा।

ये आंकड़े दर्शाते हैं कि प्रभावित निर्यात मुख्य रूप से मूल्य-संवेदनशील क्षेत्रों में हैं, जहां 2-3% ड्यूटी वृद्धि से बाजार हिस्सेदारी घट सकती है। हालांकि, कई उत्पादों में नियम ऑफ ओरिजिन और अन्य शर्तों से कुछ लाभ बरकरार रहेंगे।

सरकार की सफाई और रणनीति वाणिज्य मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ने से ही ग्रेजुएशन हुआ है, जो सकारात्मक संकेत है। FIEO (Federation of Indian Export Organisations) ने स्पष्ट किया कि EU की नोटिफिकेशन में ब्रॉड प्रोडक्ट ग्रुपिंग्स शामिल हैं, लेकिन कई स्पेसिफिक टैरिफ लाइन्स अप्रभावित रहेंगी। मंत्रालय के बयान में कहा गया कि ‘ग्रेजुएशन प्रक्रिया EU द्वारा निर्यात प्रतिस्पर्धा की नियमित समीक्षा पर आधारित है, और भारत का समय के साथ ग्रेजुएट होना इसकी बढ़ती क्षमता का प्रमाण है।’ निर्यातकों को सलाह दी गई है कि वे EU के CBAM (Carbon Border Adjustment Mechanism) जैसे नए नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करें, जो 1 जनवरी 2026 से टैक्स फेज शुरू कर रहा है।

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प्रतिस्पर्धी देशों से चुनौती GSP सस्पेंशन से बांग्लादेश, वियतनाम और श्रीलंका जैसे देशों को फायदा मिल सकता है, जिन्हें अभी भी ड्यूटी-फ्री एक्सेस है। उदाहरण के लिए, टेक्सटाइल्स में भारत का बाजार हिस्सा 15% है, लेकिन ड्यूटी वृद्धि से यह 12% तक गिर सकता है यदि निर्यातक वैकल्पिक बाजार न तलाशें। GTRI (Global Trade Research Initiative) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने चेतावनी दी कि ‘FTA समापन की आशावादिता के बावजूद, निकट अवधि में भारतीय निर्यातकों को उच्च व्यापार बाधाओं का सामना करना पड़ेगा।’ निर्यातकों को सुझाव है कि वे यूके या अमेरिका जैसे अन्य बाजारों पर फोकस करें, जहां समान योजनाएं उपलब्ध हैं।

FTA वार्ताओं का महत्व भारत-EU FTA वार्ताएं उन्नत चरण में हैं, और 27 जनवरी 2026 को संभावित समिट में घोषणा हो सकती है। यह FTA GSP के नुकसान की भरपाई कर सकता है, क्योंकि इसमें शून्य या कम ड्यूटी पर स्थायी एक्सेस मिलेगा। हालांकि, FTA लागू होने में कम से कम एक वर्ष लगेगा, इसलिए अंतरिम में निर्यातक उच्च टैरिफ का सामना करेंगे। मंत्रालय निर्यातकों को FTA के लाभों के लिए तैयार रहने की सलाह दे रहा है, जैसे कि नियम ऑफ ओरिजिन को मजबूत करना और सस्टेनेबल प्रैक्टिसेस अपनाना।

निर्यातकों के लिए व्यावहारिक कदम

अनुपालन जांचें : EU के नए नियमों के तहत, प्रभावित उत्पादों पर MFN ड्यूटी लागू होगी, इसलिए लागत गणना अपडेट करें।

विविधीकरण : एशियाई बाजारों जैसे ASEAN में अवसर तलाशें, जहां भारत के निर्यात 20% बढ़ रहे हैं।

सरकारी सहायता : PLI स्कीम्स का लाभ उठाएं, जो इंजीनियरिंग और टेक्सटाइल्स में निवेश बढ़ा रही हैं।

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CBAM तैयारी : कार्बन उत्सर्जन रिपोर्टिंग शुरू करें, क्योंकि इससे स्टील और सीमेंट जैसे क्षेत्र प्रभावित होंगे। ये कदम सुनिश्चित करेंगे कि सस्पेंशन का प्रभाव न्यूनतम रहे।

Disclaimer: यह लेख समाचार, रिपोर्ट और टिप्स पर आधारित है। स्रोतों का उल्लेख नहीं किया गया है।

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