“1986 के यूनियन बजट में वीपी सिंह ने टैक्स रिफॉर्म्स की नींव रखी, जहां इनसेंटिव्स के साथ टैक्स चोरी पर सख्त कार्रवाई की गई। MODVAT की शुरुआत से इनडायरेक्ट टैक्स में सुधार हुआ, जबकि रेड्स से बड़े इंडस्ट्रियलिस्ट्स पर शिकंजा कसा गया, जो आज GST जैसे सिस्टम की बुनियाद बना।”
1986 का यूनियन बजट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जब फाइनेंस मिनिस्टर वीपी सिंह ने ‘गाजर और छड़ी’ की पॉलिसी अपनाई। इस बजट में टैक्सपेयर्स को राहत देने वाली स्कीम्स के साथ-साथ टैक्स एवेजन पर सख्त एक्शन लिए गए। वीपी सिंह ने इनकम टैक्स और कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती की, लेकिन ब्लैक मनी और स्मगलिंग पर क्रैकडाउन शुरू किया, जिससे बड़े बिजनेसमैन प्रभावित हुए।
इस बजट की सबसे बड़ी स्पेशलिटी MODVAT (Modified Value Added Tax) की इंट्रोडक्शन थी, जो 37 चैप्टर्स में लागू की गई। इससे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कैस्केडिंग टैक्स इफेक्ट कम हुआ, और एंड कंज्यूमर्स को सस्ते प्रोडक्ट्स मिलने लगे। MODVAT ने इनडायरेक्ट टैक्स सिस्टम को ट्रांसपेरेंट बनाया, जो बाद में VAT और GST की ओर ले गया। उदाहरण के लिए, एक्साइज ड्यूटीज में रिफॉर्म से इंडस्ट्रीज को इनपुट क्रेडिट मिलना शुरू हुआ, जिससे प्रोडक्शन कॉस्ट 10-15% तक घट सकती थी।
डायरेक्ट टैक्स में वीपी सिंह ने पर्सनल इनकम टैक्स स्लैब्स को सिंप्लिफाई किया। एग्जेम्प्शन लिमिट बढ़ाकर 18,000 रुपये कर दी गई, जबकि टॉप रेट को 50% पर लाया गया। पहले यह 62% तक था, लेकिन इस कटौती से मिडिल क्लास को राहत मिली। कॉर्पोरेट टैक्स रेट को भी 50% तक घटाया गया, और सरटैक्स व सरचार्ज को एबोलिश किया गया। इन्वेस्टमेंट अलाउंस को बनाए रखा गया, जिससे कैपिटल इन्वेस्टमेंट को बूस्ट मिला।
लेकिन ‘छड़ी’ का हिस्सा और भी इंटेंस था। वीपी सिंह ने टैक्स एवेजर्स पर रेड्स का सिलसिला शुरू किया, जो ‘रेड राज’ के नाम से फेमस हुआ। इन रेड्स में बड़े इंडस्ट्रियल हाउसेज जैसे Reliance, Birla, Thapar, Modi और Kirloskar शामिल थे। उदाहरण के लिए, Dhirubhai Ambani की Reliance पर रेड्स से करोड़ों की अघोषित संपत्ति बरामद हुई, जिसने बिजनेस कम्युनिटी में हलचल मचा दी। इन एक्शंस से ब्लैक मनी पर कंट्रोल बढ़ा, और गवर्नमेंट को एडिशनल रेवेन्यू मिला। वीपी सिंह ने कहा था कि टैक्स रेट्स कम करने के साथ एवेजन पर सख्ती जरूरी है, ताकि सिस्टम फेयर बने।
बजट में स्मॉल इंडस्ट्रीज के लिए स्पेशल प्रोविजन्स थे। Small Industries Development Fund की स्थापना की गई, जो स्मॉल स्केल यूनिट्स को फाइनेंशियल सपोर्ट देती थी। इससे मॉडर्नाइजेशन और एक्सपैंशन संभव हुआ, और जॉब क्रिएशन बढ़ा। सेल्फ-एम्प्लॉयड लोगों जैसे हॉकर्स और कार्ट-पुलर्स के लिए सब्सिडाइज्ड बैंक लोन्स स्कीम लॉन्च की गई, जो अर्बन पॉवर्टी को कम करने का टारगेट रखती थी।
फाइनेंशियल मार्केट्स को बूस्ट देने के लिए न्यू म्यूचुअल फंड इंट्रोड्यूस किया गया, जो स्मॉल इन्वेस्टर्स को स्टॉक मार्केट में पार्टिसिपेट करने का मौका देता था। पब्लिक सेक्टर बॉन्ड्स पर टैक्स-फ्री रिटर्न्स दिए गए, जिससे सेविंग्स को एनकरेज किया गया। इसके अलावा, म्यूनिसिपल स्वीपर्स और रेलवे पोर्टर्स के लिए 5,000 रुपये की लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी प्रपोज की गई, जिसमें एक्सिडेंट कवर डबल था। यह स्कीम अगर 75% यूनियन मेंबर्स जॉइन करते तो लागू होती।
की पॉइंट्स ऑफ 1986 बजट रिफॉर्म्स:
इनसेंटिव्स (गाजर): टैक्स रेट्स में कटौती, MODVAT से इंडस्ट्री राहत, स्मॉल बिजनेस फंड्स।
पेनल्टीज (छड़ी): टैक्स रेड्स, एवेजन पर सख्ती, ब्लैक मनी क्रैकडाउन।
इकोनॉमिक इंपैक्ट: लाइसेंस राज की शुरुआती खत्मी, ट्रांसपेरेंसी बढ़ी, GST जैसे फ्यूचर रिफॉर्म्स की बुनियाद।
टैक्स रेट चेंजेस टेबल:
| कैटेगरी | पुरानारेट | नयारेट | इंपैक्ट |
|---|---|---|---|
| पर्सनलइनकमटैक्स(टॉपस्लैब) | 62% | 50% | मिडिलक्लासराहत,कंप्लायंसबढ़ा |
| कॉर्पोरेटटैक्स | 55-60% | 50% | बिजनेसइन्वेस्टमेंटबूस्ट |