भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) पूरा हो गया है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि इससे भारत के 99% निर्यात को यूरोपीय बाजार में शुल्क-मुक्त या कम शुल्क वाली पहुंच मिलेगी। समझौता श्रम-प्रधान क्षेत्रों जैसे टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, लेदर, फुटवेयर को तुरंत लाभ देगा, जहां 10% तक के टैरिफ जीरो हो जाएंगे। सेवाओं, मोबिलिटी और Make in India को नई ताकत मिलेगी, जबकि संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा बरकरार रहेगी।
भारत-EU FTA: 99% निर्यात को मिलेगा बूस्ट, वाणिज्य मंत्री ने समझाया हर पॉइंट
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते को भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति में निर्णायक कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता सिर्फ टैरिफ कटौती तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवाओं, प्रोफेशनल मोबिलिटी, डिजिटल ट्रेड और क्लीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में व्यापक सहयोग लाएगा। भारत ने यूरोपीय बाजार में 99% से अधिक निर्यात मूल्य के आधार पर प्राथमिकता हासिल की है।
समझौते के तहत तुरंत प्रभाव से 33 अरब डॉलर के भारतीय निर्यात पर 10% तक के टैरिफ समाप्त हो जाएंगे। यह श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए विशेष लाभकारी है। कुल मिलाकर, भारत का EU के साथ द्विपक्षीय व्यापार 2024-25 में 2.19 लाख करोड़ डॉलर से अधिक पहुंच चुका था, जिसमें निर्यात 75 अरब डॉलर के करीब था। FTA से यह आंकड़ा तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।
प्रमुख लाभ और सेक्टर-वार प्रभाव
श्रम-प्रधान क्षेत्रों को तुरंत राहत टेक्सटाइल, अपैरल, लेदर, फुटवेयर, मरीन प्रोडक्ट्स, जेम्स एंड ज्वेलरी, हैंडीक्राफ्ट्स और इंजीनियरिंग गुड्स में 10% तक टैरिफ जीरो होने से निर्यात में तेज वृद्धि होगी। इन क्षेत्रों में 33 अरब डॉलर के निर्यात को तत्काल लाभ मिलेगा। टेक्सटाइल सेक्टर अकेले 7 अरब डॉलर का निर्यात करता है और लाखों रोजगार देता है।
कृषि और प्रोसेस्ड फूड चाय, कॉफी, मसाले, ताजे फल-सब्जियां और प्रोसेस्ड फूड्स की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों को नई ताकत मिलेगी।
ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग कैलिब्रेटेड कोटा-आधारित लिबरलाइजेशन से भारतीय वाहन EU बाजार में पहुंच सकेंगे। वहीं, प्रीमियम यूरोपीय वाहनों के लिए भारत में चुनिंदा पहुंच होगी।
सेवाएं और प्रोफेशनल मोबिलिटी IT/ITeS, प्रोफेशनल सर्विसेज, एजुकेशन, फाइनेंशियल सर्विसेज, टूरिज्म में भारत को EU के 144 सब-सेक्टर्स में पहुंच मिलेगी। शॉर्ट-टर्म, बिजनेस विजिटर्स, कॉन्ट्रैक्टुअल सर्विस सप्लायर्स और इंडिपेंडेंट प्रोफेशनल्स के लिए फ्रेमवर्क बनेगा। डिपेंडेंट्स के लिए एंट्री राइट्स, सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट्स और पोस्ट-स्टडी वर्क ऑप्शंस शामिल हैं।
टैरिफ और मार्केट एक्सेस EU भारत के 99% निर्यात पर प्राथमिकता देगा, जबकि भारत EU के 97% निर्यात को कवर करेगा। EU टैरिफ 7 साल में फेज आउट होंगे, भारत के लिए 10 साल की अवधि। संवेदनशील उत्पाद जैसे डेयरी, सीरियल्स, पोल्ट्री, सोयमील और कुछ फल-सब्जियां सुरक्षित रखे गए हैं।
अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान
| सेक्टर | प्रमुख लाभ | अनुमानित प्रभावित निर्यात मूल्य |
|---|---|---|
| टेक्सटाइल और अपैरल | 10% टैरिफ जीरो, रोजगार वृद्धि | 7 अरब डॉलर+ |
| जेम्स एंड ज्वेलरी | जीरो टैरिफ, MSMEs को बूस्ट | महत्वपूर्ण हिस्सा |
| लेदर और फुटवेयर | तुरंत टैरिफ कटौती | श्रम-प्रधान क्षेत्र |
| मरीन प्रोडक्ट्स | बेहतर पहुंच, प्रतिस्पर्धा | ग्रामीण रोजगार |
| ऑटोमोबाइल | कोटा-आधारित एक्सेस, Make in India | इंजीनियरिंग गुड्स के साथ |
| कृषि/प्रोसेस्ड फूड | चाय, मसाले, फल-सब्जियां में बढ़ोतरी | ग्रामीण आय वृद्धि |
| सेवाएं (IT, एजुकेशन) | 144 सब-सेक्टर्स में पहुंच, मोबिलिटी | हाई-वैल्यू एक्सपोर्ट |
कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) : भारत को MFN क्लॉज, फ्लेक्सिबिलिटी, टेक्निकल कोऑपरेशन और फाइनेंशियल असिस्टेंस मिलेगी।
इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी : TRIPS मानकों का मजबूती से पालन, ट्रेडिशनल नॉलेज डिजिटल लाइब्रेरी को मान्यता।
डिजिटल ट्रेड और SMEs : ई-कॉमर्स, SMEs के लिए सपोर्ट, क्लीन टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और AI में सहयोग।
नॉन-टैरिफ बैरियर्स : कस्टम्स स्ट्रिमलाइनिंग, रेगुलेटरी कोऑपरेशन, SPS और TBT में पारदर्शिता।
यह समझौता भारत को UK और EFTA के साथ-साथ EU के पूरे बाजार तक पहुंच देगा। इससे Make in India, Viksit Bharat@2047 और ग्लोबल वैल्यू चेन में भारत की मजबूत स्थिति बनेगी।
Disclaimer : यह एक समाचार रिपोर्ट है।