“कीलेस इग्निशन सिस्टम RFID तकनीक पर काम करता है, जहां स्मार्ट की फॉब बाइक के कंप्यूटर से वायरलेस तरीके से जुड़ती है। फॉब 1-2 मीटर की रेंज में होने पर पुश बटन या डायल से इंजन स्टार्ट होता है। फायदे में सुविधा, सुरक्षा और तेज स्टार्ट शामिल हैं, जबकि नुकसान में फॉब बैटरी डेड होने पर समस्या, चोरी के रिले अटैक का खतरा और महंगे रिप्लेसमेंट हैं। भारत में Honda Activa, TVS Jupiter जैसे मॉडल्स में यह फीचर आम हो रहा है।”
कीलेस इग्निशन सिस्टम आधुनिक दो-पहिया वाहनों में पारंपरिक की-लॉक को बदल रहा है, जहां राइडर को फिजिकल की की जरूरत नहीं पड़ती। यह सिस्टम RFID (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) तकनीक पर आधारित है, जिसमें एक छोटा स्मार्ट की फॉब वाहन के ऑनबोर्ड कंप्यूटर से वायरलेस सिग्नल के जरिए कम्यूनिकेट करता है। फॉब में एक यूनिक कोड होता है, जो एनक्रिप्टेड होता है और बाइक का एंटीना इसे पढ़ता है। जब फॉब वाहन से 1-2 मीटर की दूरी पर होता है, तब राइडर इग्निशन डायल को टर्न कर या पुश बटन दबाकर इंजन स्टार्ट कर सकता है। उदाहरण के लिए, Honda Activa H-Smart मॉडल में फॉब को 5 सेकंड दबाकर अनलॉक करना पड़ता है, फिर ब्रेक हैंडल पकड़कर स्टार्ट बटन दबाना होता है।
यह सिस्टम इलेक्ट्रिक और पेट्रोल दोनों तरह के वाहनों में काम करता है। इलेक्ट्रिक स्कूटर्स जैसे Ather 450X या Ola S1 Pro में यह फीचर बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़ा होता है, जहां फॉब की बैटरी लो होने पर ऐप नोटिफिकेशन आता है। पारंपरिक पेट्रोल बाइक्स जैसे Yamaha R15 या TVS Apache RR 310 में कीलेस फीचर इंजन इमोबिलाइजर के साथ आता है, जो फॉब के बिना स्टार्टर मोटर को ब्लॉक कर देता है। 2026 में भारत में EV सेगमेंट में यह फीचर 80% मॉडल्स में स्टैंडर्ड हो गया है, क्योंकि NPCI और RBI के नए सिक्योरिटी गाइडलाइंस EV पेमेंट्स और रिमोट लॉकिंग को सपोर्ट करते हैं।
कीलेस इग्निशन का काम करने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका इस प्रकार है:
फॉब एक्टिवेशन: राइडर फॉब को पॉकेट में रखता है। बाइक का सेंसर फॉब के सिग्नल को डिटेक्ट करता है।
अनलॉक: फॉब बटन दबाने या प्रॉक्सिमिटी से वाहन अनलॉक होता है। कुछ मॉडल्स में PIN कोड बैकअप होता है।
इग्निशन ऑन: डायल को ऑन पोजिशन में घुमाना या बटन दबाना।
स्टार्ट: ब्रेक/क्लच पकड़कर स्टार्ट बटन प्रेस करना। इंजन फायर होता है।
राइडिंग: गियर शिफ्ट करने पर VCM (व्हीकल कंट्रोल मॉड्यूल) दोबारा फॉब की रेंज चेक करता है।
शटडाउन: इंजन ऑफ करने पर सिस्टम ऑटोमैटिकली लॉक हो जाता है, अगर फॉब दूर हो।
भारत में लोकप्रिय मॉडल्स में अंतर:
| मॉडल | ब्रांड | कीलेस फीचर डिटेल्स | कीमत रेंज (2026) |
|---|---|---|---|
| Activa H-Smart | Honda | 2 मीटर रेंज, स्मार्ट सेफ एंटी-थेफ्ट, रिमोट लॉक | ₹85,000-₹95,000 |
| Jupiter ZX | TVS | प्रॉक्सिमिटी अनलॉक, ऐप इंटीग्रेशन, PIN बैकअप | ₹80,000-₹90,000 |
| R15 V4 | Yamaha | RFID फॉब, इमोबिलाइजर, क्विक स्टार्ट | ₹1,80,000-₹2,00,000 |
| S1 Pro | Ola | EV स्पेसिफिक, ऐप से रिमोट स्टार्ट, बैटरी मॉनिटरिंग | ₹1,20,000-₹1,40,000 |
| 450X | Ather | हाई-सिक्योरिटी एनक्रिप्शन, ओवर-द-एयर अपडेट्स | ₹1,30,000-₹1,50,000 |
फायदे:
सुविधा: ग्लव्स पहने रहते हुए भी स्टार्ट करना आसान। ट्रैफिक में की ढूंढने की झंझट नहीं।
सुरक्षा: हॉट-वायरिंग असंभव, क्योंकि एनक्रिप्टेड सिग्नल। कुछ मॉडल्स में रिले अटैक प्रोटेक्शन।
फास्ट ऑपरेशन: स्टार्ट/स्टॉप सिर्फ बटन से, जिससे फ्यूल सेविंग होती है। EV में बैटरी लाइफ बढ़ती है।
एडिशनल फीचर्स: व्हीकल लोकेशन, रिमोट लॉक, अलार्म इंटीग्रेशन। भारत में UPI से जुड़े EV चार्जिंग ऐप्स के साथ कम्पैटिबल।
थेफ्ट रिडक्शन: IRDAI डेटा के अनुसार, कीलेस मॉडल्स में चोरी के क्लेम्स 30% कम।
नुकसान:
फॉब बैटरी प्रॉब्लम: अगर फॉब की बैटरी डेड हो जाए, तो वाहन स्टार्ट नहीं होगा। स्पेयर बैटरी कैरी करनी पड़ती है।
महंगा रिप्लेसमेंट: फॉब खोने पर नया ₹5,000-₹10,000 तक पड़ता है, और प्रोग्रामिंग सर्विस सेंटर में।
रिले अटैक रिस्क: चोर सिग्नल को अम्प्लिफाई कर दूर से अनलॉक कर सकते हैं। 2026 में नए मॉडल्स में यह फिक्स हो रहा है, लेकिन पुराने में खतरा।
बैटरी डिपेंडेंसी: वाहन की बैटरी डेड होने पर इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम काम नहीं करता, बम्प-स्टार्ट मुश्किल।
रेंज लिमिट: 1-2 मीटर से ज्यादा दूर फॉब होने पर अलर्ट, लेकिन पार्किंग में अगर फॉब भूल जाएं तो समस्या।
प्राइवेसी कंसर्न: RFID सिग्नल ट्रैकिंग का खतरा, हालांकि भारत के DPDP एक्ट के तहत मैन्युफैक्चरर्स इसे सिक्योर कर रहे हैं।
कीलेस सिस्टम को मेंटेन करने के टिप्स:
फॉब बैटरी हर 6 महीने चेक करें, CR2032 टाइप आमतौर पर यूज होती है।
फॉब को पानी या हाई टेम्परेचर से बचाएं।
अगर फॉब खो जाए, तो इमरजेंसी PIN यूज करें (मैनुअल में दिया होता है)।
EV मॉडल्स में ऐप से फॉब स्टेटस मॉनिटर करें।
थर्ड-पार्टी एक्सेसरीज जैसे फॉब कवर यूज करें, लेकिन ओरिजिनल से कम्पैटिबल चेक करें।
भारत में ट्रेंड्स दिखाते हैं कि 2026 तक 60% नए स्कूटर्स और 40% बाइक्स में कीलेस फीचर स्टैंडर्ड होगा, खासकर EV सेगमेंट में जहां बैटरी ऑप्टिमाइजेशन महत्वपूर्ण है। मैन्युफैक्चरर्स जैसे Bajaj और Hero भी इसे अपनाने लगे हैं, जिससे रोड सेफ्टी और यूजर एक्सपीरियंस बेहतर हो रहा है।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध समाचार, रिपोर्ट और टिप्स पर आधारित है। स्रोतों की जांच करें।