ग्रीनलैंड, वेनेजुएला और ईरान के बाद अब ट्रंप की नजर क्यूबा पर: निकल और कोबाल्ट के विशाल भंडार पर अमेरिकी दांव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति में क्यूबा अब नया फोकस बन गया है। ग्रीनलैंड की खनिज संपदा, वेनेजुएला पर नियंत्रण और ईरान में सैन्य कार्रवाई के बाद, ट्रंप प्रशासन क्यूबा के तीसरे सबसे बड़े कोबाल्ट और पांचवें सबसे बड़े निकल भंडार पर नजर गड़ाए हुए है। ईंधन कटौती और टैरिफ की धमकियों से क्यूबा की अर्थव्यवस्था चरमराई हुई है, जबकि निकल-कोबाल्ट खनन प्रभावित हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप ‘डील’ के जरिए अमेरिकी कंपनियों को इन क्रिटिकल मिनरल्स तक पहुंच दिलाना चाहते हैं, जो इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरी टेक्नोलॉजी के लिए वैश्विक सप्लाई चेन में निर्णायक साबित हो सकते हैं।

ट्रंप की नजर क्यूबा के खजाने पर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि ईरान में चल रही सैन्य कार्रवाइयों के बाद अब क्यूबा उनकी प्राथमिकता बन सकता है। ट्रंप ने मार्को रुबियो को ईरान के बाद क्यूबा से डील फाइनल करने की जिम्मेदारी सौंपी है। यह कदम ग्रीनलैंड की रेयर अर्थ मिनरल्स, वेनेजुएला के तेल और खनिज संसाधनों पर अमेरिकी नियंत्रण के बाद आया है।

क्यूबा दुनिया के तीसरे सबसे बड़े कोबाल्ट रिजर्व (लगभग 5 लाख मीट्रिक टन) और पांचवें सबसे बड़े निकल रिजर्व (लगभग 55 लाख टन) का मालिक है। ये दोनों मिनरल्स लिथियम-आयन बैटरी, इलेक्ट्रिक वाहनों और हाई-टेक इंडस्ट्री के लिए क्रिटिकल हैं। क्यूबा की Moa क्षेत्र में निकल-कोबाल्ट का उत्पादन मुख्य रूप से कनाडाई कंपनी Sherritt International के जॉइंट वेंचर से होता है। 2025 में उत्पादन 25,240 टन निकल और 2,728 टन कोबाल्ट रहा, लेकिन 2026 में ईंधन संकट के कारण ऑपरेशंस पॉज हो गए हैं।

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ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला से तेल सप्लाई रोककर और तीसरे देशों पर 30% टैरिफ की धमकी देकर क्यूबा पर दबाव बढ़ाया है। इससे क्यूबा की अर्थव्यवस्था में ईंधन, खाद्य और पर्यटन सब प्रभावित हुए हैं। Sherritt ने निकल-कोबाल्ट माइनिंग सस्पेंड कर दी है, क्योंकि ईंधन की कमी से प्रोसेसिंग असंभव हो गई। ट्रंप ने कहा है कि क्यूबा से डील हो सकती है, जिसमें अमेरिकी कंपनियां खनन में एंट्री लें, पर्यटन बढ़े और राजनीतिक कैदियों की रिहाई हो। बदले में अमेरिकी प्रतिबंध हट सकते हैं।

क्रिटिकल मिनरल्स में अमेरिकी रणनीति

ट्रंप ने ‘Project Vault’ लॉन्च किया है, जो अमेरिका का पहला स्ट्रैटेजिक क्रिटिकल मिनरल्स रिजर्व है। EXIM बैंक ने 10 बिलियन डॉलर तक लोन अप्रूव किए हैं। पिछले साल 14.8 बिलियन डॉलर के लेटर्स ऑफ इंटरेस्ट जारी हुए, जिसमें ऑस्ट्रेलिया में कोबाल्ट-निकल प्रोजेक्ट्स के लिए 350 मिलियन डॉलर शामिल हैं। क्यूबा में अमेरिकी एंट्री से चीन और रूस के प्रभाव को कम किया जा सकता है, क्योंकि वर्तमान में कनाडाई और यूरोपीय कंपनियां प्रमुख हैं।

क्यूबा के निकल-कोबाल्ट भंडार वैश्विक सप्लाई चेन में डाइवर्सिफिकेशन का मौका देते हैं। DRC 70% से ज्यादा कोबाल्ट सप्लाई करता है, लेकिन क्यूबा जैसे विकल्प अमेरिकी नेशनल सिक्योरिटी के लिए महत्वपूर्ण हैं। ट्रंप की ‘America First’ नीति में वेस्टर्न हेमिस्फियर में मिनरल्स कंट्रोल प्राथमिकता है। वेनेजुएला में इंटीरियर सेक्रेटरी डग बर्गम ने माइनिंग एक्सेस के लिए विजिट किया, जहां रेयर अर्थ्स और गोल्ड पर फोकस है। इसी तरह क्यूबा में अमेरिकी कंपनियां Sherritt की कंसेशन्स पर बोली लगा सकती हैं।

क्यूबा की स्थिति और संभावित डील

क्यूबा की अर्थव्यवस्था चरमरा चुकी है। वेनेजुएला से तेल बंद होने और टैरिफ धमकियों से ब्लैकआउट, फूड शॉर्टेज और माइग्रेशन बढ़ा है। ट्रंप ने कहा है कि वे ‘ह्यूमेनिटेरियन क्राइसिस’ नहीं चाहते, लेकिन ‘फ्री क्यूबा’ की बात भी की। संभावित डील में:

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अमेरिकी निवेश से खनन और इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडर्नाइजेशन

पर्यटन और ट्रैवल रेस्ट्रिक्शंस हटाना

राजनीतिक कैदियों की रिहाई और माइग्रेशन कोऑपरेशन

रूस-चीन टाइज कम करना

क्यूबा सरकार डील की बात से इनकार कर रही है, लेकिन आर्थिक दबाव इतना है कि समझौता संभव लगता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि रिजीम चेंज की बजाय ट्रांजैक्शनल डील ज्यादा रियलिस्टिक है, जिसमें अमेरिका को मिनरल्स एक्सेस मिले और क्यूबा को राहत।

निकल और कोबाल्ट के वैश्विक महत्व

निकल और कोबाल्ट EV बैटरी में 60-70% तक इस्तेमाल होते हैं। 2026 में ग्लोबल डिमांड बढ़ रही है, जबकि सप्लाई चेन में चीन का दबदबा है। क्यूबा जैसे सोर्स से अमेरिका अपनी डिपेंडेंसी कम कर सकता है। USGS डेटा के अनुसार, क्यूबा के रिजर्व ग्लोबल टोटल का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

ट्रंप की यह रणनीति न सिर्फ इकोनॉमिक है, बल्कि जियोपॉलिटिकल भी, जहां वेस्टर्न हेमिस्फियर में अमेरिकी प्रभाव मजबूत करना लक्ष्य है।

Disclaimer: यह न्यूज रिपोर्ट वर्तमान घटनाक्रम और उपलब्ध डेटा पर आधारित है।

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