कौन थे मोहन लाल मित्तल? जिन्होंने दुनिया की सबसे बड़ी स्टील कंपनी की रखी नींव! लक्ष्मी मित्तल को बनाया ‘स्टील किंग’.

“राजस्थान के सादुलपुर में जन्मे मोहन लाल मित्तल ने आर्थिक तंगी से जूझते हुए कोलकाता में स्टील व्यवसाय की नींव रखी, जो आज आर्सेलरमित्तल के रूप में 60 से अधिक देशों में फैली दुनिया की सबसे बड़ी स्टील कंपनी है। उनकी दूरदृष्टि ने बेटे लक्ष्मी मित्तल को ‘स्टील किंग’ बनाया, जिन्होंने वैश्विक विस्तार के जरिए कंपनी को 9 करोड़ टन से अधिक वार्षिक उत्पादन तक पहुंचाया।”

मोहन लाल मित्तल का जन्म राजस्थान के चुरू जिले के सादुलपुर (राजगढ़) कस्बे में एक साधारण परिवार में हुआ, जहां शुरुआती जीवन गरीबी और संघर्ष से भरा रहा। परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए वे कोलकाता चले गए, जहां उन्होंने एक छोटी फैक्ट्री में नौकरी शुरू की। यहां से स्टील उद्योग में उनकी रुचि बढ़ी, और उन्होंने अपनी मेहनत से बचत कर व्यवसाय की नींव रखी।

प्रारंभिक संघर्ष और व्यवसाय की शुरुआत

कोलकाता पहुंचने के बाद मोहन लाल ने चितपुर रोड पर एक छोटा अपार्टमेंट किराए पर लिया, जहां परिवार को कई बार भोजन की कमी का सामना करना पड़ा। फैक्ट्री में काम करते हुए उन्होंने स्टील उत्पादन की बारीकियां सीखीं, और 1950 के दशक में अपनी छोटी विनिर्माण इकाई शुरू की। यह इकाई मुख्य रूप से स्क्रैप मेटल से स्टील बनाने पर केंद्रित थी, जो उस समय की बाजार मांग के अनुरूप थी। उनकी ईमानदारी और कड़ी मेहनत ने व्यवसाय को स्थिरता दी, जिससे परिवार की स्थिति में सुधार हुआ।

स्टील साम्राज्य की नींव

मोहन लाल की कंपनी शुरुआत में Nippon Denro Ispat के नाम से जानी गई, जो बाद में Ispat Industries में विकसित हुई। उन्होंने उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया, और स्थानीय बाजार में स्टील की सप्लाई चेन मजबूत की। उनकी रणनीति में किफायती उत्पादन और गुणवत्ता नियंत्रण शामिल था, जिसने कंपनी को प्रतिस्पर्धी बनाया। इस नींव पर उनके बेटे लक्ष्मी मित्तल ने अंतरराष्ट्रीय विस्तार किया, इंडोनेशिया, त्रिनिदाद और मैक्सिको जैसे देशों में प्लांट खरीदे।

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लक्ष्मी मित्तल को ‘स्टील किंग’ बनाने में भूमिका

समयावधिप्रमुख घटनाएं और योगदान
1950sकोलकाता में छोटी स्टील मिल की स्थापना, स्क्रैप से उत्पादन शुरू।
1970sकंपनी का विस्तार, परिवार के सदस्यों को व्यवसाय में शामिल किया।
1980sलक्ष्मी मित्तल द्वारा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कदम, मोहन लाल की सलाह से।
2000sArcelorMittal का गठन, जो मोहन लाल की नींव पर वैश्विक नेता बनी।

मोहन लाल ने अपने बेटे लक्ष्मी को St. Xavier’s College, Kolkata से B.Com पूरा करने के बाद व्यवसाय में शामिल किया। उन्होंने लक्ष्मी को उत्पादन, वित्त और बाजार की बारीकियां सिखाईं, जो वैश्विक अधिग्रहणों में काम आईं। लक्ष्मी ने पिता की कंपनी को 2006 में Arcelor के साथ मर्ज कर दुनिया की सबसे बड़ी स्टील कंपनी बनाई, जिसका वार्ष day उत्पादन 9 करोड़ टन से अधिक है। मोहन लाल की दूरदृष्टि ने परिवार को वैश्विक स्तर पर पहुंचाया, जहां आज कंपनी 60 देशों में संचालित है और 1.9 लाख से अधिक कर्मचारी हैं।

वर्तमान स्थिति और विरासत

आज ArcelorMittal वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रही है, जैसे इटली में ILVA प्लांट पर 7 अरब यूरो के दावे और अमेरिका में Shelby प्लांट पर श्रमिक हड़ताल। फिर भी, कंपनी ने EDF के साथ फ्रांस में कम-कार्बन बिजली अनुबंध कर पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन को मजबूत किया। मोहन लाल की विरासत में सतत विकास और नवाचार शामिल है, जो लक्ष्मी मित्तल के नेतृत्व में जारी है।

मुख्य सबक : ईमानदारी से छोटी शुरुआत कर वैश्विक स्तर तक पहुंचना संभव।

परिवार का प्रभाव : मोहन लाल ने तीन बेटों को व्यवसाय सौंपा, लेकिन लक्ष्मी ने इसे वैश्विक बनाया।

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आर्थिक योगदान : कंपनी भारत में भी निवेश करती है, जैसे Jharkhand में नए प्लांट।

Disclaimer: This news is based on reports and tips from various sources.

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