“भारत का वनस्पति तेल आयात 2025-26 तेल वर्ष की पहली तिमाही (नवंबर 2025-जनवरी 2026) में 2% घटकर 39.6 लाख टन रह गया, जबकि पाम तेल का आयात 18% बढ़कर 19.1 लाख टन हो गया। सोयाबीन और सूरजमुखी तेल की कम खरीदारी के बावजूद पाम तेल की हिस्सेदारी कुल आयात में 41% से बढ़कर 49% पहुंच गई। इंडोनेशिया और मलेशिया से क्रूड पाम ऑयल की आपूर्ति प्रमुख बनी हुई है।”
भारत का वनस्पति तेल आयात घटा, मगर पाम तेल की खरीदारी बढ़ी
तेल वर्ष 2025-26 (नवंबर-अक्टूबर) की शुरुआती तिमाही में भारत ने कुल 39.60 लाख टन वनस्पति तेल आयात किया, जो पिछले साल की समान अवधि के 40.46 लाख टन से 2% कम है। इस गिरावट का मुख्य कारण सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल की आयात मात्रा में कमी रहा, जबकि पाम तेल की मांग मजबूत बनी रही।
पाम तेल (क्रूड पाम ऑयल और RBD पामोलिन सहित) का आयात इस दौरान 19.08 लाख टन पहुंच गया, जो पिछले साल की 16.21 लाख टन से 18% अधिक है। क्रूड पाम ऑयल (CPO) का आयात विशेष रूप से बढ़ा और 18.87 लाख टन रहा, जबकि RBD पामोलिन का आयात घटकर महज 9,784 टन रह गया। परिणामस्वरूप, कुल वनस्पति तेल आयात में पाम तेल की हिस्सेदारी 41% से बढ़कर 49% हो गई।
सोयाबीन तेल का आयात 12.02 लाख टन रहा, जो पिछले साल की 13.87 लाख टन से कम है। सूरजमुखी तेल आयात भी 7.62 लाख टन पर सिमट गया, जबकि पिछले साल यह 9.12 लाख टन था। रिफाइंड सोयाबीन तेल आयात 47,369 टन और रिफाइंड सूरजमुखी तेल 3,022 टन रहा।
जनवरी 2026 में पाम तेल आयात में तेज उछाल देखा गया। यह महीने में 7.66 लाख टन पहुंचा, जो दिसंबर 2025 के 5.07 लाख टन से 51% अधिक है। यह सितंबर 2025 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। पाम तेल की कीमत सोयाबीन तेल से $100 प्रति टन से अधिक सस्ती होने के कारण रिफाइनर्स ने खरीदारी बढ़ाई, जबकि सोयाबीन तेल आयात 44% गिरकर 2.79 लाख टन और सूरजमुखी तेल 23.8% गिरकर 2.67 लाख टन रह गया।
प्रमुख आपूर्तिकर्ता देश
इंडोनेशिया और मलेशिया भारत के पाम तेल आयात के दो सबसे बड़े स्रोत बने हुए हैं। नवंबर 2025-जनवरी 2026 की तिमाही में:
मलेशिया से क्रूड पाम ऑयल का आयात 8.31 लाख टन रहा।
इंडोनेशिया से क्रूड पाम ऑयल 7.24 लाख टन और RBD पामोलिन 7,300 टन आयात हुआ।
ये दोनों देश वैश्विक पाम तेल उत्पादन का बड़ा हिस्सा संभालते हैं। इंडोनेशिया 2026 में 48.8 मिलियन टन और मलेशिया 19.7 मिलियन टन उत्पादन का अनुमान है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा वनस्पति तेल आयातक है और अपनी खपत का करीब 60% आयात पर निर्भर रहता है।
आयात में बदलाव के कारण
पाम तेल की बढ़ती खरीदारी मुख्य रूप से कीमत लाभ से जुड़ी है। सोयाबीन और सूरजमुखी तेल महंगे होने पर रिफाइनर्स ने सस्ते पाम तेल की ओर रुख किया। दिसंबर 2025 में पाम तेल आयात 20% गिरा था, लेकिन जनवरी में मांग वापस लौटी। कुल वनस्पति तेल स्टॉक 1 फरवरी 2026 तक 1.75 मिलियन टन रहा, जो जनवरी की शुरुआत से अपरिवर्तित है।
2025-26 तेल वर्ष का अनुमान
उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, 2025-26 में घरेलू वनस्पति तेल उत्पादन 9.6 मिलियन टन रह सकता है, जो कुल खपत का महज 40% पूरा करेगा। शेष 16.7 मिलियन टन आयात की जरूरत होगी। इसमें पाम तेल 8-8.5 मिलियन टन, सोयाबीन तेल 5-5.5 मिलियन टन और सूरजमुखी तेल 2.8-3 मिलियन टन शामिल हो सकता है। पाम तेल आयात पिछले वर्षों से घटकर 8 मिलियन टन के आसपास पहुंचा है, लेकिन कीमत प्रतिस्पर्धा से यह फिर बढ़ सकता है।
| तेल प्रकार | नवंबर 2025-जनवरी 2026 (लाख टन) | पिछले साल समान अवधि (लाख टन) | बदलाव (%) |
|---|---|---|---|
| कुल वनस्पति तेल | 39.60 | 40.46 | -2 |
| पाम तेल | 19.08 | 16.21 | +18 |
| सोयाबीन तेल | 12.02 | 13.87 | कमी |
| सूरजमुखी तेल | 7.62 | 9.12 | कमी |
Disclaimer: यह खबर उपलब्ध आंकड़ों और उद्योग रिपोर्ट पर आधारित है। बाजार स्थितियां बदल सकती हैं।