“स्वतंत्र भारत का पहला बजट 26 नवंबर 1947 को पेश किया गया, जो अंतरिम था और 197.39 करोड़ रुपये का था, जिसमें रक्षा पर सबसे ज्यादा खर्च का प्रावधान था। ब्रिटिश काल में पहला बजट 1860 में आया, जिसकी राशि लगभग 48 मिलियन पाउंड थी।”
स्वतंत्र भारत में पहला बजट 26 नवंबर 1947 को तत्कालीन वित्त मंत्री आर.के. शनमुखम चेट्टी ने संसद में पेश किया। यह अंतरिम बजट था, जो 15 अगस्त 1947 से 31 मार्च 1948 तक की साढ़े सात महीने की अवधि के लिए तैयार किया गया। कुल व्यय 197.39 करोड़ रुपये अनुमानित था, जबकि राजस्व अनुमान 171.15 करोड़ रुपये रखा गया, जिससे राजकोषीय घाटा लगभग 26.24 करोड़ रुपये का हुआ।
इस बजट में रक्षा क्षेत्र पर सबसे अधिक जोर दिया गया, जहां 92.74 करोड़ रुपये यानी कुल व्यय का 46% हिस्सा आवंटित किया गया। रेलवे और पोस्ट-टेलीग्राफ जैसे क्षेत्रों पर 27% खर्च का प्रावधान था, जबकि अन्य मदों में कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य पर सीमित फंड रखे गए। बजट में कोई नया कर नहीं लगाया गया, क्योंकि यह संक्रमण काल का दस्तावेज था।
ब्रिटिश शासन के दौरान भारत का पहला आधुनिक बजट 7 अप्रैल 1860 को स्कॉटिश अर्थशास्त्री जेम्स विल्सन ने पेश किया। यह 1860-61 के वित्तीय वर्ष के लिए था, जिसमें राजस्व अनुमान 48 मिलियन पाउंड और व्यय 47 मिलियन पाउंड रखा गया। इस बजट ने आयकर की शुरुआत की, जो भारत में टैक्स सिस्टम की नींव रखी।
प्रमुख बिंदु:
वित्त मंत्री की भूमिका : आर.के. शनमुखम चेट्टी स्वतंत्र भारत के पहले वित्त मंत्री थे, जिन्होंने बजट को संतुलित रखने पर फोकस किया।
आर्थिक संदर्भ : आजादी के बाद की अर्थव्यवस्था में विभाजन के प्रभाव से राजस्व संग्रह चुनौतीपूर्ण था, इसलिए घाटा बजट अपनाया गया।
तुलनात्मक विकास : आज के बजट से तुलना करें तो 1947 का बजट बेहद छोटा था, जबकि वर्तमान में यह लाखों करोड़ में पहुंच चुका है।
भारत के प्रारंभिक बजटों की तालिका:
| वर्ष | वित्त मंत्री | बजट प्रकार | कुल व्यय (करोड़ रुपये में) | प्रमुख आवंटन |
|---|---|---|---|---|
| 1947-48 | आर.के. शनमुखम चेट्टी | अंतरिम | 197.39 | रक्षा (46%), रेलवे (27%) |
| 1948-49 | जॉन मथाई | पूर्ण | 275.77 | पुनर्वास और विकास पर फोकस |
| 1860-61 | जेम्स विल्सन | ब्रिटिश काल | 47 मिलियन पाउंड | आयकर की शुरुआत |
इस तालिका से स्पष्ट है कि प्रारंभिक बजटों में रक्षा और बुनियादी ढांचे पर प्राथमिकता रही, जो बाद के वर्षों में विविध क्षेत्रों में विस्तारित हुई। ब्रिटिश काल के बजट ने वित्तीय प्रणाली को औपचारिक रूप दिया, जबकि स्वतंत्र भारत के बजट ने आत्मनिर्भरता की दिशा तय की।
Disclaimer: यह रिपोर्ट ऐतिहासिक स्रोतों और रिपोर्टों पर आधारित है।