“संघ बजट 2026 से पहले स्टार्टअप्स ने सरकार से सस्ते कर्ज, टैक्स राहत और सरल अनुपालन की मांग की है। शुरुआती चरण के उद्यमों में फंडिंग की कमी और गारंटी स्कीम्स में बाधाओं पर जोर देते हुए, इंडस्ट्री ने जीएसटी थ्रेशोल्ड बढ़ाने और क्रेडिट गारंटी को मजबूत करने का आग्रह किया है। बजट में इन मांगों पर ध्यान देने से स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूती मिल सकती है।”
बजट 2026 में स्टार्टअप्स की प्रमुख मांगें स्टार्टअप फाउंडर्स ने यूनियन बजट 2026 में शुरुआती चरण के उद्यमों के लिए मजबूत प्रोत्साहन की अपील की है। मौजूदा स्कीम्स जैसे CGTMSE और MUDRA में कोलेटरल की बाधाओं के कारण लोन अप्रूवल रेट मात्र 40-50% तक सीमित है। इंडस्ट्री लीडर्स का कहना है कि बैंक और NBFC द्वारा लगाए जाने वाले अतिरिक्त शर्तों से युवा स्टार्टअप्स फंडिंग से वंचित रह जाते हैं।
सरकार से मांग है कि क्रेडिट गारंटी कवर को 20 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 50 करोड़ तक किया जाए, साथ ही गारंटी फीस को 1% से घटाकर 0.5% किया जाए। इससे सस्ते कर्ज की पहुंच बढ़ेगी, जहां ब्याज दरें 8-12% तक सीमित रह सकेंगी। टैक्स राहत के तहत, स्टार्टअप्स ने एंजेल टैक्स में छूट की सीमा को 25 करोड़ से बढ़ाकर 50 करोड़ करने की सिफारिश की है।
मुख्य मांगों की तालिका
| मांग का प्रकार | विवरण | अपेक्षित प्रभाव |
|---|---|---|
| सस्ते कर्ज की पहुंच | CGTMSE कवर बढ़ाकर 50 करोड़, फीस घटाकर 0.5% | शुरुआती स्टार्टअप्स में लोन अप्रूवल 70% तक बढ़ेगा |
| जीएसटी थ्रेशोल्ड | 20 लाख से बढ़ाकर 1 करोड़ | ऑपरेशनल लागत में 15-20% कमी, छोटे स्टार्टअप्स को राहत |
| टैक्स राहत | एंजेल टैक्स छूट 50 करोड़ तक | निवेशकों का आकर्षण बढ़ेगा, फंडिंग 30% तक उछाल |
| अनुपालन सरलीकरण | एकल विंडो क्लीयरेंस, डिजिटल फाइलिंग | अनुपालन समय 50% कम, फोकस इनोवेशन पर |
स्टार्टअप इकोसिस्टम में चुनौतियां 2025 में स्टार्टअप फंडिंग में 25% की गिरावट दर्ज हुई, मुख्यतः क्रेडिट बाधाओं के कारण। NITI Aayog की रिपोर्ट के अनुसार, 60% स्टार्टअप्स को बैंक लोन में कोलेटरल की समस्या का सामना करना पड़ता है। बजट में स्टार्टअप इंडिया सीड फंड को 10,000 करोड़ से बढ़ाकर 20,000 करोड़ करने की मांग है, जो डीप टेक और इनोवेशन को बढ़ावा देगा।
इंडस्ट्री ने सरकारी खरीद में स्टार्टअप्स के लिए 20% कोटा निर्धारित करने का सुझाव दिया है, जिससे राजस्व में स्थिरता आएगी। रियल एस्टेट और EV सेक्टर के स्टार्टअप्स ने सब्सिडी को बिक्री से जोड़ने की अपील की है, ताकि परफॉर्मेंस-बेस्ड फंडिंग सुनिश्चित हो।
उद्योग विशेषज्ञों के सुझाव
शुरुआती स्टार्टअप्स के लिए स्पेशल क्रेडिट लाइन, जहां ब्याज सब्सिडी 3-5% तक हो।
टैक्स क्रेडिट स्कीम, जहां R&D खर्च पर 200% डिडक्शन मिले।
एमएसएमई स्कीम्स को स्टार्टअप्स के साथ एकीकृत कर भुगतान को 45 दिनों तक सीमित करना।
क्लाउड और AI स्टार्टअप्स के लिए सॉवरेन इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, जो कंप्यूटिंग लागत 40% कम करेगा।
इन मांगों के पूरा होने से स्टार्टअप्स न केवल सर्वाइव करेंगे, बल्कि रोजगार सृजन में 20% योगदान बढ़ा सकेंगे।
Disclaimer: यह रिपोर्ट उपलब्ध सूचनाओं और विशेषज्ञ राय पर आधारित है। इसमें दी गई सलाह या डेटा का उपयोग व्यक्तिगत निर्णय के लिए किया जाए, लेकिन पेशेवर सलाह लें।