“आज भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखी गई, सेंसेक्स 72,696 पर बंद हुआ जो 73700 से नीचे है। निफ्टी 22,512 पर आ गया। निवेशकों की संपत्ति में करीब 14 लाख करोड़ रुपये की कमी आई। वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और रुपये की कमजोरी मुख्य वजहें रहीं। बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए।”
शेयर बाजार में फिर क्रैश, सेंसेक्स 73700 के नीचे
आज भारतीय शेयर बाजार में जोरदार गिरावट दर्ज की गई। बीएसई सेंसेक्स 1,836.57 अंक यानी 2.46% टूटकर 72,696.39 पर बंद हुआ। एनएसई निफ्टी 50 इंडेक्स 601.85 अंक या 2.60% नीचे 22,512.65 पर समाप्त हुआ। यह गिरावट पिछले कुछ सत्रों की तेजी को पूरी तरह उलट देती है और बाजार को 11 महीने के निचले स्तर के करीब ले आई है।
इस सत्र में बाजार पूंजीकरण में भारी नुकसान हुआ। बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 14 लाख करोड़ रुपये घटकर 414.77 लाख करोड़ रुपये रह गया। यह एक दिन में निवेशकों के लिए बड़ा झटका है, खासकर रिटेल निवेशकों के लिए जो हाल के महीनों में बाजार में भारी निवेश कर चुके हैं।
मुख्य वजहें क्या रहीं?
गिरावट की प्रमुख वजहें वैश्विक और घरेलू कारकों का मिश्रण हैं। सबसे बड़ा ट्रिगर अमेरिका-ईरान युद्ध से जुड़ा तनाव है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गईं, जिससे वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति का डर बढ़ा। इससे निवेशक रिस्क ऑफ मोड में चले गए।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की हॉकिश नीति भी बाजार पर भारी पड़ी। फेड ने ब्याज दरें स्थिर रखीं लेकिन मुद्रास्फीति के आंकड़ों को लेकर चिंता जताई, जिससे उभरते बाजारों से पूंजी निकासी तेज हुई। एफआईआई ने हाल के दिनों में भारतीय बाजार से भारी बिकवाली की है।
रुपया भी रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 93.86 तक गिरा, जो पिछले चार सालों में सबसे तेज एक दिवसीय गिरावट है। इससे आयातित वस्तुओं की लागत बढ़ी और कॉर्पोरेट मार्जिन पर दबाव पड़ा।
सेक्टर-वार प्रभाव
बैंकिंग सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। बैंक निफ्टी 3% से अधिक गिरा। एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और अन्य प्रमुख बैंकों में 4-5% तक की गिरावट देखी गई।
आईटी सेक्टर में भी बिकवाली रही क्योंकि वैश्विक मंदी के डर से क्लाइंट स्पेंडिंग घटने की आशंका है।
ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में मांग कमजोर होने के संकेत मिले।
एनर्जी और ऑयल मार्केटिंग कंपनियां थोड़ी बेहतर रहीं लेकिन कुल मिलाकर बाजार में 3,654 शेयरों में गिरावट जबकि सिर्फ 592 में तेजी रही।
टॉप लूजर्स और गेनर्स
| कंपनी | बदलाव (%) | बंद भाव (₹) |
|---|---|---|
| HDFC Bank | -5.1 | – |
| Bajaj Finance | -4.8 | – |
| Shriram Finance | -6.7 | – |
| Eternal (Zomato) | -5.3 | – |
| Larsen & Toubro | -4.5 | – |
कुछ डिफेंसिव सेक्टर जैसे फार्मा और एफएमसीजी में सीमित नुकसान रहा लेकिन कुल बाजार की धारणा बेहद कमजोर रही।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
यह गिरावट वैश्विक अनिश्चितताओं से जुड़ी है। कच्चे तेल की कीमतें अगर 120 डॉलर के पार जाती हैं तो मुद्रास्फीति और ब्याज दरों में बढ़ोतरी का दबाव बढ़ेगा। रुपये की कमजोरी से आयात निर्भर कंपनियां प्रभावित होंगी। रिटेल निवेशकों को लॉन्ग टर्म होल्डिंग पर फोकस रखना चाहिए लेकिन शॉर्ट टर्म में सतर्कता बरतनी होगी।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट तनाव कम होता है और फेड सॉफ्ट हो जाता है तो रिकवरी संभव है, लेकिन फिलहाल वोलेटिलिटी बनी रहेगी।
Disclaimer: यह समाचार और विश्लेषण उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। निवेश से पहले अपनी जांच और विशेषज्ञ सलाह लें।