भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद भी रूस से तेल खरीदेगा भारत? ‘सरेंडर’ वाली सोच पर जयशंकर ने दुनिया की पंचायत में दिया करारा जवाब

“विदेश मंत्री एस जयशंकर ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में स्पष्ट किया कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता पर कायम है। अमेरिका के साथ ट्रेड डील के बावजूद तेल खरीद के फैसले बाजार की उपलब्धता, लागत और जोखिम पर आधारित रहेंगे। ‘सरेंडर’ की अफवाहों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि भारत हर मुद्दे पर किसी से सहमति जरूरी नहीं मानता और स्वतंत्र निर्णय लेगा।”

म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत की ऊर्जा नीति पर अमेरिकी दावों के बीच साफ-साफ रुख जाहिर किया। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दावा किया कि भारत ने अतिरिक्त रूसी तेल खरीद रोकने का वादा किया है, लेकिन जयशंकर ने रणनीतिक स्वायत्तता को दोहराते हुए कहा कि भारत के फैसले उसके हितों पर आधारित होंगे।

जयशंकर ने जर्मन मंत्री जोहान वाडेफुल के साथ सत्र में कहा, “हम रणनीतिक स्वायत्तता के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं, क्योंकि यह हमारे इतिहास और विकास का गहरा हिस्सा है। यह किसी एक राजनीतिक दल या सरकार तक सीमित नहीं है।” उन्होंने ऊर्जा बाजार को जटिल बताते हुए जोर दिया कि भारतीय तेल कंपनियां उपलब्धता, लागत और जोखिम का आकलन करके निर्णय लेती हैं, ठीक वैसे ही जैसे यूरोप और दुनिया के अन्य हिस्सों में होता है।

उन्होंने आगे कहा, “बहुत सारी चीजें बदल रही हैं और हम सब अपनी गणनाएं कर रहे हैं। हम हर मुद्दे पर सहमत नहीं होंगे, लेकिन यदि साझा आधार मिलता है तो सहयोग होगा। लेकिन अगर सवाल यह है कि क्या हम स्वतंत्र सोच रखते हुए फैसले लेंगे जो दूसरों की सोच से अलग हो सकते हैं, तो हां, ऐसा हो सकता है।”

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यह बयान ऐसे समय आया जब अमेरिका-भारत के बीच हालिया अंतरिम ट्रेड समझौते के बाद ‘सरेंडर’ की राजनीतिक बहस छिड़ गई है। विपक्षी दल इसे आत्मसम्मान की हार बता रहे हैं, जबकि सरकार का रुख बाजार-आधारित और राष्ट्रीय हितों पर केंद्रित है। ट्रेड डील में अमेरिकी टैरिफ में राहत मिली, लेकिन ऊर्जा आयात पर दबाव के दावे सामने आए।

वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, भारत ने रूसी कच्चे तेल की खरीद में कमी दिखाई है। दिसंबर 2025 में रूस से आयात 2.7 अरब डॉलर रहा, जो नवंबर के 3.7 अरब डॉलर से 27% कम और दिसंबर 2024 के मुकाबले 15% कम है। यह 38 महीनों का न्यूनतम स्तर है। अप्रैल-दिसंबर 2025-26 में रूस से कुल 33.1 अरब डॉलर का आयात हुआ, जो कुल आयात का 31.5% है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 36.5% था।

जनवरी 2026 में रूसी क्रूड आयात औसतन 1.16 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहा, जिसमें आईओसी ने सबसे ज्यादा 0.598 मिलियन बैरल प्रतिदिन लिया। हालांकि, कुल आयात में गैर-रूसी स्रोतों से वृद्धि हुई है, जिससे रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया है। रिलायंस, नायरा जैसी कंपनियां रूसी तेल पर निर्भर रहीं, लेकिन सरकारी कंपनियां विविधीकरण कर रही हैं।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है और ऊर्जा सुरक्षा 1.4 अरब आबादी के लिए प्राथमिकता है। रूसी तेल सस्ता मिलने से 2022 के बाद आयात बढ़ा था, लेकिन अब अमेरिकी दबाव, प्रतिबंध और बाजार गतिशीलता से बदलाव आ रहा है। अमेरिका से आयात बढ़कर अप्रैल-दिसंबर 2025-26 में 8.2 अरब डॉलर पहुंचा, जो पिछले वर्ष से 7.8% ज्यादा है।

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जयशंकर का बयान भारत की बहुपक्षीय नीति को मजबूत करता है, जहां वह अमेरिका के साथ मजबूत संबंध चाहता है, लेकिन रूस जैसे पारंपरिक साझेदारों से अलग नहीं होता। उन्होंने यूरोपीय देशों का उदाहरण दिया, जो रूसी ऊर्जा पर निर्भर रहे लेकिन छूट लेकर खरीद जारी रखते हैं।

यह स्पष्ट है कि भारत ‘सरेंडर’ की सोच को नकारते हुए अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखेगा। तेल कंपनियां व्यावसायिक आधार पर फैसले लेंगी, जबकि सरकार रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखेगी।

Disclaimer: यह खबर विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों और आधिकारिक बयानों पर आधारित है। इसमें व्यक्तिगत राय शामिल नहीं है।

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